जिस पर सबसे ज़्यादा भरोसा हो, उसी का धोखा सबसे ज़्यादा चुभता है। ये बेवफ़ा शायरी उसी चुभन को बयान करती है, बिना कड़वाहट खोए।
बेवफ़ाई पर शायरी
वफ़ा की उम्मीद जिनसे की थी हमने,
उन्हीं ने सिखाया कि भरोसा क्या होता है।
तेरी बेवफ़ाई का गिला नहीं मुझको,
ग़म ये है कि तुझे ख़ुद पे शर्म नहीं आई।
वादे तो तुमने हज़ार किए थे,
एक भी निभाया होता तो बात थी।
चेहरे पे मासूमियत, दिल में फ़रेब था,
ये तो हमें बहुत बाद में पता चला।
जिन हाथों में हाथ दिया था उम्र भर के लिए,
वही हाथ किसी और का हाथ थामे मिले।
बेवफ़ा तुम थे या वक़्त, ये तय न कर पाए,
बस इतना याद है कि हम अकेले रह गए।
धोखे के बाद हौसले वाली शायरी
तुमने बदला है तो कोई बात नहीं,
हम भी अब पहले जैसे नहीं रहे।
मोहब्बत में धोखा खाकर भी दुआ करते हैं,
जहाँ रहो ख़ुश रहो, बस इतना कहते हैं।
तेरे झूठ पर भी यक़ीन कर लिया हमने,
ये हमारी सादगी थी, तेरी जीत नहीं।
कुछ लोग वक़्त की तरह होते हैं,
गुज़र जाते हैं और लौट कर नहीं आते।
सच्चा प्यार ढूँढने निकले थे हम,
और एक सबक़ लेकर लौट आए।
तुम्हें भूलना मुश्किल तो है, नामुमकिन नहीं,
हमने भी अब ख़ुद से मोहब्बत करना सीख लिया है।
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