Classic Shayari: ग़ालिब, मीर और कबीर की मशहूर शायरी

आज की शायरी की जड़ें पुराने उस्तादों में हैं। यहाँ संत कबीर (15वीं सदी), मीर तक़ी मीर (1723–1810) और मिर्ज़ा ग़ालिब (1797–1869) की कुछ मशहूर पंक्तियाँ हैं, हर एक के आसान अर्थ के साथ।

कबीर के दोहे

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

— कबीर

अर्थ: दूसरों में बुराई ढूँढने निकला तो कोई बुरा नहीं मिला। अपने भीतर झाँका तो पाया कि सबसे बुरा मैं ख़ुद हूँ।

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

— कबीर

अर्थ: किताबें पढ़-पढ़ कर कोई ज्ञानी नहीं बना। जिसने प्रेम के ढाई अक्षर समझ लिए, असली ज्ञानी वही है।

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥

— कबीर

अर्थ: हर काम अपने समय पर होता है। माली सौ घड़े पानी डाल दे, फल तो मौसम आने पर ही लगते हैं।

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

— कबीर

अर्थ: जो कल करना है वो आज करो, जो आज करना है वो अभी। कौन जाने अगले पल क्या हो।

मीर तक़ी मीर

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है

— मीर तक़ी मीर

अर्थ: बाग़ का हर पत्ता और पौधा मेरा हाल जानता है। अगर कोई नहीं जानता तो बस वो फूल (महबूब), जिसके लिए ये हाल है।

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

— मीर तक़ी मीर

अर्थ: महबूब के होंठों की नज़ाकत का क्या बयान करें, वो गुलाब की पंखुड़ी जैसे हैं।

इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या
आगे आगे देखिए होता है क्या

— मीर तक़ी मीर

अर्थ: ये तो इश्क़ की शुरुआत (इब्तिदा) है, अभी से क्यों रोते हो? आगे देखो क्या-क्या होता है।

मिर्ज़ा ग़ालिब

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ: हज़ारों ऐसी चाहतें हैं जिन पर जान निकल जाए। बहुत से अरमान पूरे भी हुए, फिर भी कम लगे।

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ: ऐ नासमझ दिल, तुझे क्या हो गया है? इस दर्द का इलाज आख़िर क्या है?

इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ: इश्क़ ने हमें किसी काम का नहीं छोड़ा, वरना हम भी काम के आदमी थे।

ग़ालिब के और मशहूर शेर, आसान अर्थ के साथ, हमारी ग़ालिब शायरी पोस्ट में पढ़ें।

और पढ़ें